मूल कर्तव्य (उड़ान)

मूल कर्तव्य (उड़ान)

  • मूल संविधान में केवल मूल अधिकार थे न कि मूल कर्तव्य।
  • 1976 में, मूल अधिकारों को 42वें संविधान संशोधन द्वारा संविधान में जोड़ा गया था। एक और मूल अधिकार को 86वें संविधान संशोधन (2002) द्वारा जोड़ा गया था।
  • मूल या मौलिक कर्तव्यों की अवधारणा को पूर्व सोवियत संघ के संविधान से लिया गया है।
  • इस समय लोकतान्त्रिक देशों में भारत एवं जापान ही ऐसे देश हैं, जहां संविधान में मूल कर्तव्यों का समावेश है।
  • सुप्रीम कोर्ट (1992) का निर्णय किसी भी कानून की संवैधानिक वैधता की दृष्टि से व्याख्या में यदि अदालत को मालूम चले कि मौलिक कर्तव्यों के संबंध में विधि में प्रश्न उठते हैं तो अनुच्छेद 14 या अनुच्छेद 19 के संदर्भ में इन्हें तर्कसंगत माना जा सकता है और इस प्रकार ऐसी विधि को असंवैधानिकता से बचाया जा सकता है।
  • कर देने का कर्तव्य (स्वर्ण सिंह समिति द्वारा अनुशंसित) और चुनाव में मतदान देने का कर्तव्य, संविधान में उल्लिखित मौलिक कर्तव्यों में शामिल नहीं हैं।
  • मौलिक कर्तव्य, न्यायालयों को किसी विधि की संवैधानिक वैधता एवं उनके परीक्षण के संबंध में सहायता करते हैं।

 

                       

     स्वर्ण सिंह समिति की सिफ़ारिशें
  • सर्वप्रथम 1976 में स्वर्ण सिंह समिति ने 8 मूल कर्तव्यों को संविधान में शामिल करने की सिफ़ारिश की थी। इसकी आवश्यकता आंतरिक आपातकाल (1975-77) के दौरान महसूस की गई थी।
  • 42वें संविधान संसोधन (1976) के द्वारा संविधान में एक नया भाग IV-A जोड़ा गया, जिसमें अनुच्छेद 51A है। 42वें संविधान संसोधन द्वारा इसमें 10 मूल कर्तव्यों को जोड़ा गया था, जबकि वर्तमान में इसमें 11 मूल कर्तव्य हैं।
  • स्वर्ण सिंह समिति की कुछ सिफ़ारिशों को स्वीकार नहीं किया गया था, यथा- मूल कर्तव्य के उल्लंघन पर दंड देने का प्रावधान आदि।

 

                       

         मूल कर्तव्यों की सूची
  1. संविधान का पालन करें और उसके आदर्शों, संस्थाओं, राष्ट्रध्वज एवं राष्ट्रीय गान का आदर करें।
  2. स्वतंत्रता के लिये राष्ट्रीय आंदोलन को प्रेरित करने वाले उच्च आदर्शों को हृदय में संजोये रखें और उनका पालन करें।
  3. भारत की संप्रभुता, एकता और अखंडता की रक्षा करें तथा उसे अक्षुण्ण रखें।
  4. देश की रक्षा करें और आह्वान किये जाने पर राष्ट्र की सेवा करें।
  5. भारत के सभी लोगों में समरसता और समान भातृत्व की भावना का निर्माण करें जो धर्म, भाषा और प्रदेश या वर्ग आधारित सभी प्रकार के भेदभाव से परे हो, ऐसी प्रथाओं का त्याग करें जो स्त्रियों के सम्मान के विरुद्ध हैं।
  6. हमारी समृद्ध संस्कृति की गौरवशाली परंपरा का महत्त्व समझें और उसका परिरक्षण करें।
  7. प्राकृतिक पर्यावरण जिसके अंतर्गत वन, झील, नदी और वन्य जीव आते हैं, आदि की रक्षा करें।
  8. वैज्ञानिक दृष्टिकोण से मानववाद और ज्ञानार्जन तथा सुधार की भावना का विकास करें।
  9. सार्वजनिक संपत्ति को सुरक्षित रखें और हिंसा से दूर रहें।
  10. व्यक्तिगत और सामूहिक गतिविधियों के सभी क्षेत्रों में उत्कर्ष की ओर बढ़ने का सतत प्रयास करें जिससे राष्ट्र प्रगति की और निरंतर बढ़ते हुए उपलब्धि की नई ऊँचाइयों को छू ले।
  11. जो माता-पिता या संरक्षक हों वह, छ: से चौदह वर्ष के बीच की आयु के, यथास्थिति, अपने बच्चे अथवा प्रतिपाल्य को शिक्षा प्राप्त करने के अवसर प्रदान करेगा।

 

                       

          मूल कर्तव्यों की विशेषताएँ
  • मूल कर्तव्य केवल भारतीय नागरिकों के लिए हैं। ये विदेशियों के लिए नहीं हैं।
  • मूल कर्तव्य न्याय-योग्य या वाद योग्य नहीं हैं। हालांकि, संसद उपयुक्त कानून के माध्यम से इन्हें लागू कर सकती है।
  • नोट: कर अदायगी और मतदान करने का कर्तव्य मूल कर्तव्यों का हिस्सा नहीं हैं।

 

                   

        वर्मा समिति की मूल कर्तव्यों पर टिप्पणियाँ (1999)
  • कुछ मूल कर्तव्यों की पहचान व उनके क्रियान्वयन हेतु कानूनी प्रावधानों को लागू करने की व्यवस्थाएँ की गई हैं- जैसे-वन्यजीव संरक्षण अधिनियम, 1972।
  • वर्मा समिति ने स्कूल पाठ्यक्रम और शिक्षक के शिक्षा कार्यक्रमों (teacher’s education programmes) हेतु पुनर्संरचना(reorienting) तथा उच्च व व्यावसायिक शिक्षा में मूल कर्तव्यों को शामिल करने की सिफारिश की।
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